न पास भाई की कलाई है
न हमने राखी भिजवाई है
फिर भी उत्साह में न कोई कमी है
हाँ आंखों में बस थोड़ी नमी है
इस बार हर त्योहार का बदला है कुछ ढंग
इस बार की राखी का कुछ अलग ही है रंग
भाई की लम्बी उम्र की कामना है
इस लिए तो अरमानो को थामना है
भाई दूर रहे या रहे पास
सही सलामत रहे यही है आस
बीत जाए ये महामारी फिर से होंगे संग
इस बार की राखी का कुछ अलग ही है रंग
राखी रेशम से हो या फिर हो मौली से बनी
बांध कर इसे भाई खुद को समझता है धनी
रह कर दूर एक दूसरे को देना हिदायत
"नियमों का करो पालन , न करो शिकायत"
भाई बहन के प्यार का ये भी तो है एक ढंग
इस बार की राखी का कुछ अलग ही है रंग
स्नेह के धागों से बंधी ये दिल की है डोर
एक सिरा बहन तो भाई है इसका दूसरा छोर
दूरी, महामारी या चाहे कोई हो परेशानी
भाई बहन के प्रेम ने भी जिद्द ये है ठानी
हरा के इस महामारी को फिर होंगे संग
इस बार की राखी का कुछ अलग ही है रंग