Wednesday, 26 August 2020

आक़िबत

 बड़ा हसीन हो जाए आक़िबत मेरा

जो मेरे बख़्त से जुड़ जाए नाम तेरा

Tuesday, 25 August 2020

वाबस्ता

 दिल जान कर भी बनता अनजान है

अँधेरी गलियों से पूछता उनकी  पहचान है 

कुछ इस कदर वाबस्ता था उनसे कि

उन्होंने ठुकराया इस बात का भी हमे गुमान है

Monday, 17 August 2020

ग़ैर

 अब हमने अपनो और गैरों में फर्क करना छोड़ दिया है

करें भी कैसे जब गैरों की तरह अपनो ने भी मुँह मोड़ लिया है

Saturday, 15 August 2020

परछाई

बनकर परछाई वो साथ चलने का वादा कर हमें छल गए,
जैसे अंधेरे में साथ छोड़ देती है परछाई वो भी हमें छोड़ कर चल गए

मन की किताब

बड़ी ही अनोखी है  ये मन की किताब,

पन्ने कम है और लिखने को हज़ारो हैं ख्वाब।

Sunday, 2 August 2020

इस बार की राखी का कुछ अलग ही है रंग

न पास भाई की कलाई है
न हमने राखी भिजवाई है
फिर भी उत्साह में न कोई कमी है
हाँ आंखों में बस थोड़ी नमी है
इस बार हर त्योहार का बदला है कुछ ढंग 
इस बार की राखी का कुछ अलग ही है रंग 
            
          भाई की लम्बी उम्र की कामना है
          इस लिए तो अरमानो को थामना है
          भाई दूर रहे या रहे पास 
         सही सलामत रहे यही है आस
        बीत जाए ये महामारी  फिर से होंगे संग
       इस बार की राखी का कुछ अलग ही है रंग

राखी रेशम से हो या फिर हो मौली से बनी
बांध कर इसे भाई खुद को समझता है धनी
रह कर दूर एक दूसरे को देना हिदायत 
"नियमों का करो पालन , न करो शिकायत"
भाई बहन के प्यार का ये भी तो  है एक ढंग 
इस बार की राखी का कुछ अलग ही है रंग 

                    
         स्नेह के धागों से बंधी ये दिल की है डोर
         एक सिरा बहन तो भाई है इसका दूसरा छोर
         दूरी, महामारी या चाहे कोई हो परेशानी
         भाई बहन के प्रेम ने भी जिद्द ये है ठानी
       हरा के इस महामारी को फिर होंगे संग
       इस बार की राखी का कुछ अलग ही है रंग