Saturday, 28 November 2020

सब मिथ्या है

 अब जाने की बारी आयी

तो जीवन पर नजर घुमाई

झोंक दिया सब यौवन

अर्जित करने को धन

सुख खोजते रहे खजाने में

दुःखी होते रहे उसे पाने में

दूर होता गया परिवार

जीवन मे भर लिया विकार

अब सोच रहे सब तो खोया है

व्यर्थ मृत्यु सोच हर कोई रोया है

मृत्यु ही तो सत्य है

बाकी सब मिथ्या है


Thursday, 19 November 2020

उदासी

 उदासी छिपाने को सबसे, हम चेहरे पर इल्जाम लगाते है।

उदास दिल है, और हम चेहरा ही है ऐसा  बोल जाते है।

Friday, 13 November 2020

हाँ क्यूंकि वो नारी है

वो हर मकान को घर बना देती है


पर खुद घर का सुख कहाँ लेती है


कभी बाप का कभी भाई का


और फिर घर पति की कमाई का


दो घरो की उठाती जिम्मेदारी है


हाँ  क्यूंकि  वो नारी है




मारना पीटना उसे दिखा देना  दहलीज़


पलट जवाब दे दे तो घोषित कर देना बद्तमीज़


लाख गलतियां तुम करना


हक़ है तुम्हे ये दम भरना


पर उसकी हर गलती बहुत भारी है


हाँ  क्यूंकि  वो नारी है




उसकी सुबह से सांझ का कोई अनुमान न लगाना 


"घर पर करती ही क्या हो" का मार देना ताना


छोटी छोटी बचते उसकी किस काम की


उसकी तो बिंदी भी लगती तुम्हे ज्यादा दाम की


उसके हर काम में दिखती बेकारी है


हाँ  क्यूंकि  वो नारी है




न करेगी विरोध सब सह जाएगी


घर बचाने को अपना, चुप रह जाएगी


एक घर ने पराया कह विदा किया 


दूसरे ने कभी अपना बनने नहीं दिया


हर तरफ से हुई बेचारी है


हाँ क्यूंकि वो नारी है 






बहुत हुआ, अब सहना और नहीं 


मत सिखाओ क्या गलत क्या सही 


बेटी, बीवी ,बहु, माँ सब फर्ज निभाए है


फिर भी उसके हिस्से दुखो के कर्ज आये है


वो अबला नहीं सब शक्तियों की प्रभारी है


हाँ क्यूंकि वो नारी है 




उस जननी का क्यों करते हो अपमान


अरे कम से कम उसे समझो इंसान


इज्जत प्रेम की वो भी है हकदार


उसकी इच्छाओ को मत करो दरकिनार


मुसीबत जैसी भी हो,साथ देती हर बारी है


हाँ क्यूंकि वो नारी है 




 


जीवन की गाड़ी का वो भी एक हिस्सा है


उसकी बातो से भरा दुनिया का हर किस्सा है


ये दुनिया बहुत संवर जाएगी


जब वह फिर से सम्मान पायेगी


उसमे दुनिया बदलने की शक्ति सारी है


हाँ क्यूंकि वो नारी है


Sunday, 8 November 2020

फुलझड़ी

 "फुलझड़ी देना"

"एक डब्बी फुलझड़ी बोलो"

"समझ गयी न!तो फुलझड़ी दो"

"एक डब्बी फुलझड़ी बोलो"

"क्यों"

"किससे लड़ रही है फुलझड़ी,क्या लोगे बेटा"

"जी फुलझड़ी,नहीं एक डब्बी फुलझड़ी"

गुस्से से लाल फुलझड़ी को देख गांव में नया आया राज सोचने लगा सही नाम है: चिंगारी फेंकती "फुलझड़ी"

दीवाली

 "इतनी मिठाई?हम दोनों बूढों के सिवा कोई घर मे है नहीं और तुम्हे शुगर है तो इतनी मिठाई क्यों?"

"राधे को दूंगा,कुर्ता भी बनवाया है उसके लिए।दीवाली पर उस गरीब के घर मे भी खुशियो की रोशनी हो जाएगी"

"सच मे चौकीदार होकर भी lockdown में उसने ऐसा ख्याल रखा जैसे हमारा ही बच्चा हो"

Sunday, 1 November 2020




क्या अद्भुत कलाकारी है

बच्चे को गोद मे बिठाए माँ प्यारी है

वो पल भी कितना कमाल होगा

जब हाथ मे हथौड़ी और मन मे माँ का ख्याल होगा

भाव ऐसा की लोहे में भी लचक ला दी

कठोर लोहे में भी माँ की झलक दिखा दी

प्रेम

 देवकी का जाया 

यशोदा ने पाला

एक ने की रचना

दूसरी ने ढाला


बरसाने की राधा

गोकुल का ग्वाला

झेल गयी विरह

न कान्हा को टाला


मीरा सी भक्तिन

कान्हा सा रखवाला

न झिझकी एक बार भी

पी गयी जहर प्याला 


प्रेम का ऐसा रूप

निश्छल और निराला

ढाई अक्षर के प्रेम को

सहज ही परभाषित कर डाला


रिटायरमेंट

 "तैयार हो गए पापा।ये जैकेट माँ लायी थी न आपकी रिटायरमेंट के लिए।अरे काला चशमा तो रह गया।माँ ने कहा था जैकेट के साथ पहनना "जितेंद्र" लगोगे।अभी माँ गुस्सा हो जाती।"

"गुस्सा तो मैं हुँ।बहुत प्यार से लाई थी न सब पर मेरी रिटायरमेंट देखने से पहले खुद दुनिया से रिटायर हो गयी"।