Friday, 13 November 2020

हाँ क्यूंकि वो नारी है

वो हर मकान को घर बना देती है


पर खुद घर का सुख कहाँ लेती है


कभी बाप का कभी भाई का


और फिर घर पति की कमाई का


दो घरो की उठाती जिम्मेदारी है


हाँ  क्यूंकि  वो नारी है




मारना पीटना उसे दिखा देना  दहलीज़


पलट जवाब दे दे तो घोषित कर देना बद्तमीज़


लाख गलतियां तुम करना


हक़ है तुम्हे ये दम भरना


पर उसकी हर गलती बहुत भारी है


हाँ  क्यूंकि  वो नारी है




उसकी सुबह से सांझ का कोई अनुमान न लगाना 


"घर पर करती ही क्या हो" का मार देना ताना


छोटी छोटी बचते उसकी किस काम की


उसकी तो बिंदी भी लगती तुम्हे ज्यादा दाम की


उसके हर काम में दिखती बेकारी है


हाँ  क्यूंकि  वो नारी है




न करेगी विरोध सब सह जाएगी


घर बचाने को अपना, चुप रह जाएगी


एक घर ने पराया कह विदा किया 


दूसरे ने कभी अपना बनने नहीं दिया


हर तरफ से हुई बेचारी है


हाँ क्यूंकि वो नारी है 






बहुत हुआ, अब सहना और नहीं 


मत सिखाओ क्या गलत क्या सही 


बेटी, बीवी ,बहु, माँ सब फर्ज निभाए है


फिर भी उसके हिस्से दुखो के कर्ज आये है


वो अबला नहीं सब शक्तियों की प्रभारी है


हाँ क्यूंकि वो नारी है 




उस जननी का क्यों करते हो अपमान


अरे कम से कम उसे समझो इंसान


इज्जत प्रेम की वो भी है हकदार


उसकी इच्छाओ को मत करो दरकिनार


मुसीबत जैसी भी हो,साथ देती हर बारी है


हाँ क्यूंकि वो नारी है 




 


जीवन की गाड़ी का वो भी एक हिस्सा है


उसकी बातो से भरा दुनिया का हर किस्सा है


ये दुनिया बहुत संवर जाएगी


जब वह फिर से सम्मान पायेगी


उसमे दुनिया बदलने की शक्ति सारी है


हाँ क्यूंकि वो नारी है


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