वो हर मकान को घर बना देती है
पर खुद घर का सुख कहाँ लेती है
कभी बाप का कभी भाई का
और फिर घर पति की कमाई का
दो घरो की उठाती जिम्मेदारी है
हाँ क्यूंकि वो नारी है
मारना पीटना उसे दिखा देना दहलीज़
पलट जवाब दे दे तो घोषित कर देना बद्तमीज़
लाख गलतियां तुम करना
हक़ है तुम्हे ये दम भरना
पर उसकी हर गलती बहुत भारी है
हाँ क्यूंकि वो नारी है
उसकी सुबह से सांझ का कोई अनुमान न लगाना
"घर पर करती ही क्या हो" का मार देना ताना
छोटी छोटी बचते उसकी किस काम की
उसकी तो बिंदी भी लगती तुम्हे ज्यादा दाम की
उसके हर काम में दिखती बेकारी है
हाँ क्यूंकि वो नारी है
न करेगी विरोध सब सह जाएगी
घर बचाने को अपना, चुप रह जाएगी
एक घर ने पराया कह विदा किया
दूसरे ने कभी अपना बनने नहीं दिया
हर तरफ से हुई बेचारी है
हाँ क्यूंकि वो नारी है
बहुत हुआ, अब सहना और नहीं
मत सिखाओ क्या गलत क्या सही
बेटी, बीवी ,बहु, माँ सब फर्ज निभाए है
फिर भी उसके हिस्से दुखो के कर्ज आये है
वो अबला नहीं सब शक्तियों की प्रभारी है
हाँ क्यूंकि वो नारी है
उस जननी का क्यों करते हो अपमान
अरे कम से कम उसे समझो इंसान
इज्जत प्रेम की वो भी है हकदार
उसकी इच्छाओ को मत करो दरकिनार
मुसीबत जैसी भी हो,साथ देती हर बारी है
हाँ क्यूंकि वो नारी है
जीवन की गाड़ी का वो भी एक हिस्सा है
उसकी बातो से भरा दुनिया का हर किस्सा है
ये दुनिया बहुत संवर जाएगी
जब वह फिर से सम्मान पायेगी
उसमे दुनिया बदलने की शक्ति सारी है
हाँ क्यूंकि वो नारी है
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