Sunday, 26 July 2020

शहीद की माँ


सब रो रहे थे सीना पीट पीट कर , 
ले रहे थे उसके दुख की थाह
वो बैठी थी जैसे कोई शीतल लहर
या जैसे बिन हल चल के शांत राह
क्यों विलाप करे वो , क्यों बहाये नीर
क्यों कोसे भगवान,क्यो कोसे पीर
दिल भरा हुआ था, पर  माथे पर उसके, जैसे बहुत  सुकून था
वो गर्वित थी, जो शहीद हुआ उसका बेटा, उसका अपना खून था

Thursday, 9 July 2020

जुबाँ

मन कहना बहुत कुछ चाहता था पर जुबाँ कुछ ख़फ़ा सी थी
सोचा आँखे कुछ बयां कर देगी पर कमबख्तों ने जुबाँ से निभानी वफ़ा जो थी

Sunday, 5 July 2020

शब्द

ख्यालो को शब्दों में ढाला तो वो जग जाहिर हो गए,
चुप रहकर भी हम अपना हाल बताने में माहिर हो गए।

Saturday, 4 July 2020

इल्म

पढ़ पढ़ फ़ाज़िल होया नकली इल्म हज़ार।
असली इल्म न पड़े इज़्ज़त, वफ़ा और प्यार।

~ पुनीता मिश्रा