सब रो रहे थे सीना पीट पीट कर ,
ले रहे थे उसके दुख की थाह
वो बैठी थी जैसे कोई शीतल लहर
या जैसे बिन हल चल के शांत राह
क्यों विलाप करे वो , क्यों बहाये नीर
क्यों कोसे भगवान,क्यो कोसे पीर
दिल भरा हुआ था, पर माथे पर उसके, जैसे बहुत सुकून था
वो गर्वित थी, जो शहीद हुआ उसका बेटा, उसका अपना खून था
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