Thursday, 9 July 2020

जुबाँ

मन कहना बहुत कुछ चाहता था पर जुबाँ कुछ ख़फ़ा सी थी
सोचा आँखे कुछ बयां कर देगी पर कमबख्तों ने जुबाँ से निभानी वफ़ा जो थी

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