Sunday, 1 November 2020

प्रेम

 देवकी का जाया 

यशोदा ने पाला

एक ने की रचना

दूसरी ने ढाला


बरसाने की राधा

गोकुल का ग्वाला

झेल गयी विरह

न कान्हा को टाला


मीरा सी भक्तिन

कान्हा सा रखवाला

न झिझकी एक बार भी

पी गयी जहर प्याला 


प्रेम का ऐसा रूप

निश्छल और निराला

ढाई अक्षर के प्रेम को

सहज ही परभाषित कर डाला


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