देवकी का जाया
यशोदा ने पाला
एक ने की रचना
दूसरी ने ढाला
बरसाने की राधा
गोकुल का ग्वाला
झेल गयी विरह
न कान्हा को टाला
मीरा सी भक्तिन
कान्हा सा रखवाला
न झिझकी एक बार भी
पी गयी जहर प्याला
प्रेम का ऐसा रूप
निश्छल और निराला
ढाई अक्षर के प्रेम को
सहज ही परभाषित कर डाला
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