नन्ही सी कली
चली तारो की गली
पूछे सिसक सिसक के
थोड़ा हिचक हिचक के
क्यों भेजती हो वहाँ
तुम नो होगी जहाँ
आने दो न इस संसार मे
कठोर इस जीवन व्यापार में
लालची मुझे तुम न मानना
बस देखना है इस जग को और कुछ है जानना
न देना संदूक, न देना पेटी
बस एक बार कह देना "मेरी बेटी"
मन तुम्हारा भी उदास है
ग्लानि का ग्रास है
मैं तो हुँ तुम्हारी नन्ही सी कली
रोक लो न मुझे जाने से तारो की गली
जा के वहाँ ये तारा टूट जाएगा
माँ-बेटी का ये नाता छूट जाएगा
ऐसे हैरान क्यों हो लेटी
मैं कोई और नही तुम्हारी ही "अजन्मी बेटी"

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