** या तो चुप रह के सह लो,
या फिर अपने मन की कह लो।
** संभालना बड़ा मुश्किल,
एक जिद्दी दिमाग और दूसरा फ़ितना दिल
** ना ना कहते हुए भी हमसे हाँ हो गयी,
दिल की बात थी जो आँखों से बयाँ हो गयी।
** शब्द तो मेरे हैं पर सोच है तेरी,अगर तुझे समझ आये तभी जीत होगी मेरी।
** न तीर से न तलवार से
चोट लगती है ज्यादा शब्दों के वार से
** हम भी कभी आबाद थे,बेफिक्र थे,आजाद थे ।
** मुझसे ही बात पूछकर बिलकुल अंजान बन गए,
पहले तो तुम सिर्फ झूठे थे,अब तो बेईमान बन गए।
** ख्यालो को शब्दों में ढाला तो वो जग जाहिर हो गए
चुप रहकर भी हम अपना हाल बताने में माहिर हो गए
या फिर अपने मन की कह लो।
** संभालना बड़ा मुश्किल,
एक जिद्दी दिमाग और दूसरा फ़ितना दिल
** तन्हाई में ही मिलता है दिल को सुकून और चैन
पता नहीं भीड़ में क्यों घबरा जाते हैं मेरे ये नैन
** रात सुन मेरी ख्वाइश ,ठहर जा लम्हा कुछ और
तेरे सहारे ही तो चलता है तारो से बातो का दौर
तेरे सहारे ही तो चलता है तारो से बातो का दौर
** काश जमानत मिल जाये मेरे अरमानो को किसी के आने से
खुद ही कैद कर के रखा है जिन्हें अभी तक मैंने जमाने से
** अगर आँखों ने अपना फर्ज निभाया होता
अपनी चुप्पी पे मेरा दिल पछताया न होता** ना ना कहते हुए भी हमसे हाँ हो गयी,
दिल की बात थी जो आँखों से बयाँ हो गयी।
** शब्द तो मेरे हैं पर सोच है तेरी,अगर तुझे समझ आये तभी जीत होगी मेरी।
** न तीर से न तलवार से
चोट लगती है ज्यादा शब्दों के वार से
** हम भी कभी आबाद थे,बेफिक्र थे,आजाद थे ।
** मुझसे ही बात पूछकर बिलकुल अंजान बन गए,
पहले तो तुम सिर्फ झूठे थे,अब तो बेईमान बन गए।
** ख्यालो को शब्दों में ढाला तो वो जग जाहिर हो गए
चुप रहकर भी हम अपना हाल बताने में माहिर हो गए
No comments:
Post a Comment