Saturday, 16 January 2021

दरवाज़ा

 30 साल पहले शीशम की लकड़ी से बना दरवाज़ा आज भी कायम था।तीनो बेटे घर का बँटवारा कर दरवाज़ा अपने हिस्से लेने के लिए लड़ रहे थे।मज़बूत दरवाज़ा आज कमजोर बूढ़ी माँ से ज़्यादा अहम था जिसे अपने हिस्से लेने कोई तैयार न था।शायद यह भी तय न था- वो दरवाजे के इस पार रहेगी या उस पार।

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