Sunday, 31 January 2021

चांद से गुफ्तगू

 जो न कही गयी

बात वो कहनी है

तू राज़दार मेरा

बीच हमारे रहनी है

रात अमावस्या की

दिल घबराता है

ग़म मेरे मन का 

मन मे रह जाता है

इंतजार हर रात

हो तेरा दीदार 

ऐ चांद बिन तेरे

मन मेरा बेज़ार 

गुज़ारिश करू रात से

ठहर जा लम्हा कुछ और

तुझ से ही तो चलता है

चांद से गुफ्तगू का दौर

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