इज्जत को करके तार तार
कहाँ शांत हुए वो खुंखार
हैवानियत की हर हद को कर पार
उसके प्राण हरने के लिए किया प्रहार
जिस जुबाँ से देती थी वो माँ को पुकार
काट दिया उस जुबाँ को कर दिया बेकार
कई सपने थे उसके जिनको करना था साकार
पर उसकी तो सांसे भी लूट ले गया ये संसार
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