कैसे जाए इस संसार में
कई बातें लाये अपने विचार में
अब रावण बैठा हर घर मे
जीना पड़ेगा अब तो डर में
सब पापी और भक्षक है
कृष्णा,राम जैसे न रक्षक है
नारी के मान का अब कोई मोल नही
मूक दर्शको के मुँह में कोई बोल नही
हर दिन नारी चिता पर है लेटी
सोच ये सब घबराए अजन्मी "बेटी"
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