नया कुर्ता पहन बाबा,राजू की शादी पर उत्सुक थे।गांव के सबसे बुजुर्ग थे,बुलावा बनता था।शादी हो गयी पर बुलावा न आया। कुर्ता पेटी में रखते हुए बाबा को कुर्ते पर दाग दिखा। "लाज रख ली भगवान ने,अच्छा हुआ बुलावा नही आया,बेज्जती होती"।कुर्ते के दाग से अपने मन को मना रहे थे बाबा।
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