तुम धूप के जैसे बन जाना
हर मौसम में मिल जाना
खुश हो बन जाना सर्दी की धूप
गुस्से में ले लेना गर्मी का रूप
बादल, बरखा सब आएंगे
अपने अंदर तुम्हें छिपाएंगे
तुम इंद्रधनुष बना कर फिर निकल आना
सब छोड़ पीछे एक बार फिर खिल जाना
तुम धूप के जैसे बन जाना
हर मौसम में मिल जाना
No comments:
Post a Comment