Saturday, 17 October 2020

तुम धूप के जैसे बन जाना

 तुम धूप के जैसे बन जाना

हर मौसम में  मिल जाना

खुश हो बन जाना सर्दी की धूप

गुस्से में ले लेना गर्मी का रूप

बादल, बरखा  सब आएंगे

अपने अंदर तुम्हें छिपाएंगे

तुम इंद्रधनुष बना कर फिर निकल आना

सब छोड़ पीछे एक बार फिर खिल जाना

तुम धूप के जैसे बन जाना

हर मौसम में मिल जाना

 

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