घर की हर कमी छुपा रहा था
एक पर्दा मेरा घर सजा रहा था
फर्जी साख और मान था
पर्दा मेरी झूठी शान था
जितनी भी चीख औऱ पुकार थी
सब पर्दे के पीछे बेकार थी
छिपाने का एक जरिया था
पर्दा झूठ से भरा दरिया था
एक दिन पर्दे में सुराख़ हो गया
बेदाग़ सा घर मेरा दागदार हो गया
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