Sunday, 11 October 2020

पर्दा

 घर की हर कमी छुपा रहा था

एक पर्दा मेरा घर सजा रहा था

फर्जी साख और  मान था

पर्दा मेरी झूठी शान था

जितनी भी चीख औऱ पुकार थी

सब पर्दे के पीछे बेकार थी

छिपाने का एक जरिया था

पर्दा झूठ से भरा दरिया था

एक दिन पर्दे में सुराख़ हो गया

बेदाग़ सा घर मेरा दागदार हो गया


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